Seizure, Convulsion और Epilepsy: क्या करें, और मदद कब बुलाएँ
आख़िरी समीक्षा: 9 अक्तूबर 2026 · लेखक: बिस्वा प्रकाश स्वाईं, नर्सिंग ऑफिसर (बीएससी नर्सिंग, एमपीएच)
छोटा जवाब: शांत रहें और समय देखना शुरू करें। आसपास की कठोर चीज़ें हटा दें, सिर के नीचे कुछ नरम रखें, और झटके रुकने के बाद उन्हें करवट पर लिटा दें। उन्हें पकड़कर रोकें नहीं। मुँह में कुछ भी न डालें। 108 (एम्बुलेंस) या 112 पर कॉल करें अगर seizure पाँच मिनट तक पहुँच जाए, दूसरा seizure शुरू हो जाए, यह उनका पहला seizure हो, या उन्हें चोट लगी हो, वे गर्भवती हों, पानी में हों, ठीक से साँस न ले रहे हों, या उन्हें डायबिटीज़ हो और होश न आए।
Seizure घर पर, बस स्टॉप पर, ऑफिस में या ट्रेन में कभी भी पड़ सकता है। जो लोग इसे देखते हैं उनमें से ज़्यादातर ने पहले कभी नहीं देखा होता — और पहली प्रतिक्रिया यही होती है कि व्यक्ति को पकड़कर रोक लें, मुँह में चम्मच या चाबी डाल दें, या चेहरे पर पानी छिड़कें। ये तीनों चीज़ें नुक़सान पहुँचाती हैं।
ज़्यादातर seizure कुछ ही मिनटों में अपने आप रुक जाते हैं। आपका काम seizure को रोकना नहीं है। आपका काम है उस दौरान व्यक्ति को सुरक्षित रखना, और उन कुछ स्थितियों को पहचानना जिनमें एम्बुलेंस बुलाना ज़रूरी है।
Seizure क्या है? convulsion और epilepsy से यह कैसे अलग है?
दिमाग़ की तंत्रिका कोशिकाएँ बिजली के संकेतों से आपस में बात करती हैं। Seizure इसी बिजली की गतिविधि में कुछ देर के लिए आई गड़बड़ी है, जो हरकत, होश, भावनाओं या व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।
Convulsion का मतलब है मांसपेशियों का अपने आप अकड़ना और झटके लगना। यह seizure के दौरान हो सकती है, लेकिन हर seizure में convulsion नहीं होती। कुछ लोग बस कुछ पल के लिए एकटक देखने लगते हैं, उलझन में आ जाते हैं, बार-बार एक ही हरकत करते हैं — जैसे होंठ चलाना या कपड़े मसलना — या कुछ सेकंड के लिए जवाब देना बंद कर देते हैं।
Epilepsy वह स्थिति है जिसमें दिमाग़ में बार-बार seizure पड़ने की प्रवृत्ति बनी रहती है। एक seizure पड़ने का मतलब epilepsy नहीं होता।
| इनमें से कोई एक बात सही हो, तो epilepsy मानी जाती है |
|---|
| 24 घंटे से ज़्यादा के अंतर पर कम से कम दो बिना किसी तात्कालिक कारण के seizure |
| एक ऐसा seizure, और अगले 10 साल में दोबारा seizure पड़ने की आशंका लगभग 60% या उससे ज़्यादा |
| किसी Epilepsy syndrome की पहचान |
“बिना किसी तात्कालिक कारण के” का मतलब है कि उस वक़्त कोई ऐसी तात्कालिक वजह मौजूद नहीं थी — जैसे बहुत कम ब्लड शुगर या सिर में चोट — जो अकेले ही उस seizure की व्याख्या कर देती।
Seizure क्यों पड़ते हैं?
कारणों में epilepsy, बहुत कम ब्लड शुगर, ख़ून में नमक (जैसे सोडियम) का असंतुलन, दिमाग़ का संक्रमण, स्ट्रोक, सिर की चोट, ब्रेन ट्यूमर और शराब छोड़ने पर होने वाली स्थिति शामिल हैं। छोटे बच्चों में तेज़ बुख़ार से भी seizure पड़ सकता है। कई बार कोई कारण पता नहीं चलता।
बेहोशी, लो ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन की कुछ गड़बड़ियाँ और कुछ मानसिक स्थितियाँ भी seizure जैसी दिख सकती हैं। देखने वाले के तौर पर आपका काम है जो आपने देखा वह बताना — यह तय करना नहीं कि वह क्या था। अक्सर डॉक्टर को मिलने वाली सबसे काम की जानकारी यही होती है।
Seizure के दौरान क्या करें
- शांत रहें और समय देखें। घड़ी देख लें। आसपास खड़े लोगों से कहें कि थोड़ा हटकर जगह दें।
- चोट से बचाएँ। आसपास की कठोर या नुकीली चीज़ें, गरम चाय, फ़र्नीचर के कोने हटा दें। सिर के नीचे कुछ नरम और सपाट रखें — मोड़ा हुआ दुपट्टा, जैकेट या बैग। गले के पास कसे कपड़े ढीले कर दें। चश्मा उतार दें।
- उन्हें तभी हिलाएँ जब सचमुच ख़तरा हो — जैसे ट्रैफ़िक, आग, पानी या रेलवे प्लेटफ़ॉर्म का किनारा।
- पकड़कर रोकें नहीं। हाथ-पैर दबाकर रखने से seizure जल्दी नहीं रुकता, बल्कि कंधा उतर सकता है या आपको भी चोट लग सकती है।
- मुँह में कुछ भी न डालें। न चम्मच, न चाबी, न उँगली, न कपड़ा, न प्याज़। जबड़ा ज़बरदस्ती खोलने की कोशिश न करें। कोई व्यक्ति अपनी जीभ नहीं निगल सकता। मुँह में डाली गई चीज़ों से दाँत टूटते हैं, मसूड़े कटते हैं और दम घुट सकता है।
- पानी, खाना या गोली न दें जब तक वे पूरी तरह होश में न आ जाएँ। न थप्पड़ मारें, न चेहरे पर पानी फेंकें, न उन्हें खड़ा करने या चलाने की कोशिश करें।
- मेडिकल आईडी देखें — कोई ब्रेसलेट, लॉकेट या कार्ड जिस पर epilepsy, डायबिटीज़ या किसी दवा का ज़िक्र हो। एम्बुलेंस टीम के लिए यह बहुत काम की जानकारी होती है।
- उनकी इज़्ज़त का ख़याल रखें। seizure के दौरान पेशाब निकल सकता है। भीड़ हटाएँ और ज़रूरत हो तो ढक दें। वीडियो बनाने से पहले मदद करें।
अगर व्यक्ति को convulsion नहीं हो रही, बल्कि वह उलझन में है, इधर-उधर घूम रहा है या कपड़े नोच रहा है, तो उसे पकड़ें या टोकें नहीं। पास रहें, धीरे से बात करें, और सड़क, सीढ़ी और पानी से दूर ले जाएँ।
झटके रुकने के बाद क्या करें
सबसे पहले देखें कि वे ठीक से साँस ले रहे हैं या नहीं।
अगर साँस सामान्य है लेकिन होश नहीं आया: उन्हें धीरे से करवट पर लिटा दें, मुँह थोड़ा नीचे की ओर रहे, ताकि लार या उल्टी बाहर निकल जाए और साँस की नली खुली रहे। इसे रिकवरी पोज़िशन कहते हैं। कोई भी करवट चलेगी; गर्भवती महिला को बाईं करवट लिटाना बेहतर है, क्योंकि इससे गर्भाशय का भार एक बड़ी नस पर नहीं पड़ता। साँस पर नज़र रखें। अकड़े हुए हाथ-पैर ज़बरदस्ती न मोड़ें।
अगर होश नहीं है और साँस भी ठीक से नहीं चल रही: तुरंत 108 या 112 पर कॉल करें, सीपीआर शुरू करें और ऑपरेटर के निर्देश मानें। Seizure के दौरान सीपीआर की ज़रूरत नहीं होती, और जब तक झटके चल रहे हों तब तक मुँह से साँस भी नहीं देनी चाहिए।
होश आने पर वे उलझन में, बहुत थके हुए, डरे हुए या थोड़ी देर के लिए चिड़चिड़े हो सकते हैं। यह सामान्य है और जानबूझकर नहीं होता। उन्हें बताएँ कि वे कहाँ हैं और क्या हुआ था। उनके पास रुकें। घरवालों को फ़ोन करने की पेशकश करें। पूरी तरह होश में आने से पहले कुछ भी खाने-पीने को न दें।
एम्बुलेंस कब बुलाएँ
इनमें से कोई एक बात भी हो तो 108 या 112 पर कॉल करें। अगर कोई दूसरा ख़तरे का संकेत पहले से मौजूद है, तो पाँच मिनट का इंतज़ार बिल्कुल न करें।
- Seizure पाँच मिनट तक पहुँच जाए, या अब भी चल रहा हो
- पहले seizure से होश आने से पहले ही दूसरा seizure शुरू हो जाए
- यह उनका पहला seizure हो
- उन्हें चोट लगी हो, साँस लेने में तकलीफ़ हो, या होश न आ रहा हो
- Seizure पानी में पड़ा हो
- व्यक्ति गर्भवती हो
- व्यक्ति को डायबिटीज़ हो और होश न आए
- उनके अपने लिखित केयर प्लान में पहले कॉल करने को कहा गया हो
पाँच मिनट ही क्यों? इंटरनेशनल लीग अगेंस्ट एपिलेप्सी की 2015 की परिभाषा के अनुसार पाँच मिनट वह बिंदु है जिसके बाद seizure के अपने आप रुकने की संभावना कम हो जाती है और इलाज शुरू हो जाना चाहिए। लगभग 30 मिनट से आगे जाने पर दिमाग़ को स्थायी नुक़सान का ख़तरा रहता है। जो seizure रुकता ही नहीं, या बार-बार seizure पड़ें और बीच में होश न आए — उसे Status epilepticus कहते हैं, और यह मेडिकल इमरजेंसी है।
108 या 112? 108 नेशनल हेल्थ मिशन के तहत भारत का एम्बुलेंस नंबर है, और यही नंबर ज़्यादातर लोगों को याद रहता है। 112 एक ही राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर है, जहाँ से कॉल पुलिस, स्वास्थ्य, फ़ायर और आपदा सेवाओं तक पहुँचती है। दोनों से मदद मिलेगी; एम्बुलेंस आमतौर पर 108 से सबसे जल्दी आती है।
पहला seizure: कहाँ जाएँ?
नज़दीकी अस्पताल की इमरजेंसी में जाएँ, भले ही अब व्यक्ति बिल्कुल ठीक लग रहा हो। पहली जाँच के लिए न्यूरोलॉजिस्ट की अपॉइंटमेंट का इंतज़ार न करें।
अगर वे अब भी ठीक महसूस नहीं कर रहे या ऊपर बताया कोई संकेत मौजूद है, तो एम्बुलेंस का ही इस्तेमाल करें। उन्हें ख़ुद गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। अगर वे पूरी तरह ठीक हैं और इमरजेंसी स्टाफ़ कहे कि अपनी गाड़ी से जाना ठीक है, तो कोई ज़िम्मेदार बड़ा व्यक्ति साथ जाए।
साथ ले जाएँ: हो सके तो वह व्यक्ति जिसने seizure देखा, seizure का समय और विवरण, चल रही दवाओं की सूची, और पुराने मेडिकल रिकॉर्ड। जाँचों से ज़्यादा काम अक्सर देखने वाले का बयान आता है।
इमरजेंसी जाँच के बाद विशेषज्ञ से फ़ॉलो-अप तय करें — बड़ों के लिए न्यूरोलॉजिस्ट, और बच्चों के लिए seizures का अनुभव रखने वाले बाल रोग विशेषज्ञ। ब्रिटेन की NICE गाइडलाइन कहती है कि पहले संदिग्ध seizure के दो हफ़्ते के भीतर यह विशेषज्ञ अपॉइंटमेंट हो जानी चाहिए — माँगने के लिए यह एक ठीक मानक है।
कौन-सी जाँचें हो सकती हैं
हालात के हिसाब से डॉक्टर ब्लड शुगर, ख़ून के नमक और दिल की धड़कन की जाँच कर सकते हैं, और ईईजी (जो दिमाग़ की बिजली की गतिविधि रिकॉर्ड करता है) या एमआरआई/सीटी स्कैन करा सकते हैं।
हर व्यक्ति को हर जाँच की ज़रूरत नहीं होती। दो बातें जानना ज़रूरी है:
- ईईजी नॉर्मल आने का मतलब यह नहीं कि epilepsy नहीं है। ईईजी कुछ ही देर की रिकॉर्डिंग है और बाक़ी समय होने वाली गड़बड़ी इसमें छूट सकती है।
- एक seizure के बाद लंबी दवा अपने आप शुरू नहीं होती। इलाज शुरू करना है या नहीं, यह कारण और दोबारा seizure पड़ने की आशंका पर निर्भर करता है।
अगर किसी को पहले से epilepsy है
अगर seizure उनके सामान्य पैटर्न जैसा ही है और उसके बाद वे हमेशा की तरह ठीक हो जाते हैं, तो हर बार एम्बुलेंस की ज़रूरत नहीं पड़ती। उनके लिखित केयर प्लान का पालन करें — लेकिन ऊपर बताए इमरजेंसी संकेत तब भी लागू रहते हैं।
रोज़मर्रा के प्रबंधन के लिए:
- दवाएँ नियमित रूप से लें। डॉक्टर की सलाह के बिना दवा बंद या कम-ज़्यादा न करें — अचानक बंद करने से लंबा seizure पड़ सकता है।
- Seizures की डायरी रखें: तारीख़, समय, कितनी देर चला, कैसा दिखा, कितनी देर में होश आया, और संभावित कारण।
- अगर seizure बढ़ जाएँ, उनका रूप बदल जाए, लंबे अंतराल के बाद दोबारा शुरू हों, या इलाज के बावजूद जारी रहें — तो दोबारा दिखाएँ।
- डॉक्टर से लिखित एक्शन प्लान माँगें, जिसमें यह भी हो कि मदद कब लेनी है।
- रेस्क्यू दवा तभी दें जब आपको इसकी ट्रेनिंग मिली हो और आप उस व्यक्ति के प्लान के अनुसार चल रहे हों।
दवा छूट जाना या देर से लेना — नियंत्रित epilepsy के बेक़ाबू होने की सबसे आम वजहों में से एक है। एक साधारण साप्ताहिक डिब्बा “सुबह की दवा ली थी या नहीं?” वाला सवाल ही ख़त्म कर देता है, और यह किसी रिमाइंडर ऐप से ज़्यादा काम आता है।
🛒 आसान विकल्प: PharmEasy 7 Day Weekly Pill Box
सात दिन का डिब्बा, बड़े ख़ानों के साथ। हफ़्ते में एक बार भर लें, फिर एक नज़र में पता चल जाता है कि ख़ुराक ली गई या नहीं।
डिब्बा याद रखने में मदद करता है, फ़ैसला लेने में नहीं। डॉक्टर की सलाह के बिना ख़ुराक कभी न बदलें।
अगर दवाओं से seizure काबू में नहीं आ रहे, तो विशेषज्ञ से दोबारा सलाह ज़रूरी है। आगे और विकल्प मौजूद हैं, कुछ लोगों के लिए सर्जरी भी।
घर पर रोज़मर्रा की सुरक्षा
जब तक डॉक्टर पहले seizure की जाँच न कर ले: गाड़ी न चलाएँ, अकेले तैरने न जाएँ, ऊँचाई पर या ख़तरनाक मशीनों के साथ काम न करें। जिन्हें epilepsy की पुष्टि हो चुकी है, उन्हें ये सावधानियाँ अपने डॉक्टर से अलग से तय करनी चाहिए, क्योंकि ये seizure के प्रकार और नियंत्रण पर निर्भर करती हैं।
ऐसे उपाय जिन पर कुछ ख़र्च नहीं होता या बहुत कम होता है:
- बाल्टी-टब से नहाने के बजाय शॉवर, और बाथरूम का दरवाज़ा अंदर से बंद न करें।
- पानी के पास निगरानी रखें — बाल्टी और टंकी भी इसमें शामिल हैं।
- खुली आग, प्रेशर कुकर और गरम चूल्हे के पास सावधानी रखें।
- नींद पूरी लें और दवाएँ समय पर लें — कम नींद और छूटी ख़ुराक सबसे आम ट्रिगर हैं।
- घर के लोगों को यह प्राथमिक उपचार आना चाहिए, और पता होना चाहिए कि केयर प्लान और रेस्क्यू दवा कहाँ रखी है।
बाथरूम पर ख़ास ध्यान देने की ज़रूरत है। गीला फ़र्श और अचानक होश खो देना — घर में होने वाली ज़्यादातर सिर की चोटें इसी तरह होती हैं, और भारतीय बाथरूम आमतौर पर बाथटब वाले नहीं, गीले फ़र्श वाले होते हैं।
🛒 आसान विकल्प: एंटी-स्किड रबर बाथरूम मैट (काटकर फ़िट करने लायक़)
पानी निकलने के छेदों वाली पीवीसी मैट, जिसे कैंची से अपने बाथरूम के नाप पर काटा जा सकता है। गीले फ़र्श के लिए बनी है, बाथटब के लिए नहीं।
मैट फिसलन कम करती है। यह seizure को नहीं रोकती, और दरवाज़ा अंदर से बंद न करने का विकल्प भी नहीं है।
अगर आप अकेले बाहर निकलते हैं
Epilepsy के साथ बहुत से लोग सफ़र करते हैं, नौकरी करते हैं और अकेले रहते हैं — और इसमें सबसे काम की चीज़ यह है कि कोई अजनबी समझ सके कि हो क्या रहा है। Seizure के दौरान आप ख़ुद कुछ नहीं बता सकते, और शुरुआती कुछ मिनट ही तय करते हैं कि आपको सही मदद मिलेगी या ग़लत।
इस पर कोई ख़र्च नहीं आता। पर्स में एक कार्ड, जिस पर आपका नाम, “epilepsy” शब्द, आपकी दवाएँ और एक इमरजेंसी नंबर लिखा हो — यही काफ़ी है। फ़ोन की लॉक स्क्रीन पर लिखा नोट भी वही काम करता है, और ज़्यादातर Android और iPhone में इसे बिना फ़ोन खोले पढ़ा जा सकता है। पहले यही कर लें। अगर आप कुछ ऐसा पहनना चाहें जो पीछे छूट न सके, तो उकेरा हुआ बैंड उसी बात का ख़रीदा हुआ रूप है।
उस पर क्या लिखें: आपका नाम, “epilepsy” शब्द, आप कौन-सी दवाएँ लेते हैं, और एक इमरजेंसी फ़ोन नंबर। इतना काफ़ी है। इसे पढ़कर कोई अजनबी जान जाएगा कि 108 पर कॉल करना है और एम्बुलेंस वालों को क्या बताना है।
🛒 वैकल्पिक: मेडिकल अलर्ट आईडी ब्रेसलेट (मुफ़्त कस्टम एनग्रेविंग के साथ)
स्टेनलेस स्टील का उकेरा हुआ बैंड। अगर आप अकेले सफ़र करते हैं और कार्ड के पर्स में बने रहने पर भरोसा नहीं करना चाहते, तो काम का है।
पूरी तरह वैकल्पिक। लिखा हुआ कार्ड या फ़ोन की लॉक स्क्रीन पर नोट भी उतना ही काम करता है, और मुफ़्त है।
भारत की तस्वीर
भारत में लगभग 1% आबादी epilepsy से प्रभावित है — अध्ययनों के अनुमान के अनुसार एक करोड़ से ज़्यादा लोग।
बड़ी समस्या बीमारी नहीं, इलाज तक न पहुँच पाना है। भारतीय समीक्षाओं के अनुमान के मुताबिक़ यह अंतर शहरी मध्यम-आय वर्ग में लगभग 22% से लेकर गाँवों में 90% तक है — यानी ग्रामीण भारत में epilepsy से पीड़ित ज़्यादातर लोगों को असरदार इलाज नहीं मिल रहा। (ये आँकड़े 2010 में प्रकाशित और 2014 में समीक्षित शोध से हैं। ये आज भी सबसे ज़्यादा उद्धृत अनुमान हैं, लेकिन एक दशक से पुराने हैं और मौजूदा स्थिति अलग हो सकती है।)
इस अंतर के पीछे बड़ी वजह है कलंक और ग़लत जानकारी — यह मान्यता कि seizure भूत-प्रेत, जादू-टोने या श्राप से आते हैं, जिसकी वजह से परिवार डॉक्टर से पहले ओझा के पास जाते हैं। इसलिए यह साफ़ कहना ज़रूरी है:
Epilepsy छूत की बीमारी नहीं है। यह न श्राप है, न सज़ा, न कोई ऊपरी साया। यह दिमाग़ की एक चिकित्सकीय स्थिति है, और इलाज मिलने पर ज़्यादातर लोगों के seizure अच्छी तरह काबू में आ जाते हैं।
अगर इस लेख से और कुछ याद न रहे, तो इतना याद रखें: seizure का समय देखें, व्यक्ति को सुरक्षित रखें, मुँह में कुछ न डालें, और पाँच मिनट होने पर 108 पर कॉल करें।
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स्रोत
- Centers for Disease Control and Prevention. First Aid for Seizures. cdc.gov
- Fisher RS et al. ILAE Official Report: A practical clinical definition of epilepsy. Epilepsia, 2014. DOI: 10.1111/epi.12550
- Trinka E et al. A definition and classification of status epilepticus — Report of the ILAE Task Force. Epilepsia, 2015. DOI: 10.1111/epi.13121
- NICE. Epilepsies in children, young people and adults (NG217), 2022. nice.org.uk
- गृह मंत्रालय, भारत सरकार. Emergency Response Support System (112). mha.gov.in
- भारत सरकार, लोकसभा अतारांकित प्रश्न — आपातकालीन एम्बुलेंस सेवाएँ (डायल 108). eparlib.nic.in
- Satishchandra P, Santhosh NS, Sinha S. Epilepsy: Indian perspective. Ann Indian Acad Neurol, 2014;17(S1):S3–S11. PMC4001222
चिकित्सा अस्वीकरण: यह लेख केवल शिक्षा के लिए है और पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। अगर आपको या आपके किसी परिचित को seizure पड़ा है, तो कृपया डॉक्टर को दिखाएँ। यहाँ व्यक्त विचार निजी हैं और किसी नियोक्ता या संस्थान का प्रतिनिधित्व नहीं करते।
