कोई बेहोश (faint) हो जाए तो क्या करें: पहले एक मिनट की फ़र्स्ट एड
Last reviewed: 19 अक्टूबर 2026 · 4 sources (लेख के अंत में)। सिर्फ़ शैक्षणिक जानकारी। Jaan Bachayega India series का हिस्सा।
जल्दी में जवाब: नाम लेकर पुकारें और कंधा थपथपाएं, फिर छाती को ज़्यादा से ज़्यादा 10 सेकंड तक देखें। साँस सामान्य चल रही है तो उन्हें पीठ के बल सीधा लिटाएं और पैर ऊपर उठाएं। 1 मिनट में होश न आए तो 108 या 112 पर कॉल करें और recovery position में रखें। साँस बिल्कुल नहीं चल रही, या सिर्फ़ gasping है, तो तुरंत 112 पर कॉल करें और CPR शुरू करें। चेहरे पर पानी न डालें, बैठाएं नहीं, थप्पड़ न मारें।
हमारे घरों में होने वाली तीन चीज़ें जो हालत बिगाड़ सकती हैं: चेहरे पर या मुँह में पानी डालना, बैठा देना, और थप्पड़ मारना या ज़ोर से हिलाना। हर एक मददगार लगती है, लेकिन इनमें से कोई भी first aid नहीं है।
3 बड़ी गलतियाँ और वे गलत क्यों हैं
1. चेहरे या मुँह में पानी
जो व्यक्ति faint हुआ है वह पूरी तरह होश में नहीं होता और सुरक्षित तरीके से निगल नहीं सकता। मुँह में डाला गया पानी गलत रास्ते जाकर दम घुटने का कारण बन सकता है। चेहरे पर पानी छिड़कने से दिमाग़ तक खून वापस नहीं पहुँचता। NHS की सलाह सीधी है: जब तक व्यक्ति पूरी तरह ठीक न हो जाए, उसे कुछ खाने या पीने को न दें।
2. बैठा देना या खड़ा कर देना
Faint तब होता है जब थोड़ी देर के लिए दिमाग़ तक खून का बहाव कम हो जाता है। सीधा लेटना इसे संभलने में मदद करता है। व्यक्ति को ऊपर खींचने पर वही दोबारा हो सकता है, और वे गिरकर सिर पर चोट खा सकते हैं। उन्हें लेटा ही रहने दें।
3. थप्पड़ मारना या ज़ोर से हिलाना
ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि थप्पड़ मारने से होश जल्दी आता है, और इससे चोट लग सकती है, ख़ासकर तब जब गिरने में सिर या गर्दन पर पहले ही चोट आ चुकी हो। सही तरीका है: ज़ोर से नाम पुकारें और कंधा थपथपाएं।
Step by step: क्या करें
Step 1: Response चेक करें
उनके पास घुटनों के बल बैठें। नाम लेकर ज़ोर से पुकारें और कंधा थपथपाएं। नाम न पता हो तो कहें “सुन रहे हैं आप?” उन्हें हिलाएं नहीं।
Step 2: साँस चेक करें
छाती को देखें कि वह ऊपर-नीचे हो रही है या नहीं, ज़्यादा से ज़्यादा 10 सेकंड तक। यह सबसे ज़रूरी जाँच है। सबसे पहले यही करें।
Step 3: साँस सामान्य है? सीधा लिटाएं और पैर ऊपर उठाएं
साँस सामान्य चल रही है तो उन्हें पीठ के बल सीधा लिटाएं। पैरों को बैग, तकिए या अपनी गोद पर रखकर ऊपर उठाएं, ताकि पैर दिल के स्तर से ऊपर रहें। गले और कमर के कसे कपड़े ढीले करें और ताज़ी हवा आने दें। भीड़ को पीछे हटने को कहें। व्यक्ति के पास रहें।
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छोटी किट जिसमें gauze, cotton, bandage, tape और plasters हैं। काम आती है अगर गिरने में खरोंच लग जाए।
खरीदने से पहले contents देख लें। इसमें एक alcohol swab है। Faint हुए व्यक्ति के लिए यह कुछ नहीं करती। उनके लिए सीधा लेटना ही मदद है।
Step 4: 1 मिनट में होश नहीं आया? 108 या 112 पर कॉल करें और recovery position दें
1 मिनट में होश न आए तो तुरंत 108 या 112 पर कॉल करें। मदद आने तक, अगर साँस चल रही है, तो उन्हें करवट पर recovery position में लिटाएं: ऊपर वाला घुटना मोड़ दें ताकि शरीर आगे न लुढ़के, सिर को थोड़ा पीछे झुकाएं ताकि साँस का रास्ता खुला रहे, और मदद आने तक हर कुछ सेकंड में साँस दोबारा चेक करते रहें। उन्हें अकेला न छोड़ें।
Gasping का मतलब साँस नहीं है
यह इस लेख का सबसे ज़रूरी हिस्सा है। अगर व्यक्ति साँस नहीं ले रहा, या सिर्फ़ gasping कर रहा है (धीमी, आवाज़ वाली हाँफनी जो सामान्य साँस जैसी नहीं दिखती), तो उसे अभी मदद चाहिए। 112 पर कॉल करें और CPR शुरू करें। होश आने का इंतज़ार न करें। पानी न दें। पहले गाड़ी तक न उठाएं।
Gasping साँस जैसी दिख सकती है, इसीलिए ख़तरनाक है। यह cardiac arrest के शुरुआती मिनटों में हो सकती है और इसका मतलब हो सकता है कि दिल रुक गया है। CPR के पूरे स्टेप हमारी CPR गाइड में हैं। बस यह फ़ैसला याद रखें: साँस नहीं, या सिर्फ़ gasping, मतलब 112 पर कॉल करें और CPR शुरू करें।
मदद के लिए कॉल कैसे करें
112 डायल करें, यह राष्ट्रीय emergency नंबर है। ओडिशा और कई अन्य राज्यों में 108 मुफ़्त एम्बुलेंस का नंबर है। यह हर राज्य में नहीं है, इसलिए हर जगह 112 याद रखें। हो सके तो फ़ोन speaker पर रखें ताकि हाथ खाली रहें। इस क्रम में बताएं:
- आप कहाँ हैं। इलाका, पास का landmark, PIN code या ज़िला। साफ़ लोकेशन से एम्बुलेंस जल्दी पहुँचती है।
- क्या हुआ। “एक व्यक्ति faint हो गया है और जाग नहीं रहा” या “साँस नहीं ले रहा।”
- कितने लोगों को मदद चाहिए, और व्यक्ति की मोटी-मोटी उम्र।
- आपका फ़ोन नंबर। पहले कॉल न काटें। सामने वाले को ही कॉल खत्म करने दें।
एक व्यक्ति को मुख्य सड़क या गेट पर भेजें ताकि वह एम्बुलेंस को रास्ता दिखाए। गेट खोल दें और रास्ता साफ़ रखें। अगर पास में हों तो व्यक्ति की दवाइयाँ और पुरानी रिपोर्ट तैयार रखें।
अस्पताल कैसे पहुँचें
सबसे सुरक्षित तरीका एम्बुलेंस है, क्योंकि रास्ते में प्रशिक्षित स्टाफ़ व्यक्ति का ध्यान रख सकता है। एम्बुलेंस देर से आए या उपलब्ध न हो, तो निजी वाहन तभी ठीक है जब व्यक्ति होश में हो या साँस सामान्य चल रही हो। उन्हें पीछे की सीट पर लिटाएं, किसी को साथ बैठाएं जो साँस पर नज़र रखे, और सबसे नज़दीकी उस अस्पताल जाएं जहाँ emergency department हो, मशहूर लेकिन दूर वाले अस्पताल नहीं। रास्ते में साँस रुक जाए तो गाड़ी रोकें और CPR शुरू करें। जो व्यक्ति साँस नहीं ले रहा उसे समय बचाने के लिए गाड़ी में न बिठाएं। जहाँ हैं वहीं 112 पर कॉल करें और CPR शुरू करें। यह हिस्सा व्यावहारिक सलाह है, किसी guideline से उद्धरण नहीं।
अस्पताल में emergency स्टाफ़ को बताएं: क्या हुआ, व्यक्ति कितनी देर बेहोश रहा, सिर पर चोट लगी या नहीं, और कौन-सी दवाइयाँ या बीमारियाँ हैं, जैसे diabetes, दिल की बीमारी या blood pressure।
होश आने के बाद
- कुछ देर लेटा रहने दें। पूरी तरह संभलने दें।
- धीरे-धीरे बैठने में मदद करें और कुछ मिनट बैठे रहने दें।
- पानी तभी दें जब वे पूरी तरह सजग हों और सामान्य रूप से निगल सकें।
- तुरंत खड़ा न होने दें। जल्दी उठने पर चक्कर आकर दोबारा faint हो सकता है।
- जब तक वे बिल्कुल सामान्य न हो जाएं, उनके पास रहें।
इन हालात में तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं
- सीने में दर्द
- तेज़, धड़कता हुआ या अनियमित दिल की धड़कन
- कसरत के दौरान, या लेटे हुए faint होना
- सिर पर चोट, या गिरने से चोट
- seizure: काँपना या झटके आना
- बोलने या हिलने-डुलने में तकलीफ़
- दोबारा faint होना
- पहले मिनट के बाद भी पूरी तरह ठीक न होना
ख़ास हालात
गर्भवती महिला
गर्भवती महिला को पीठ के बल सीधा लिटाने के बजाय करवट पर लिटाएं, ख़ासकर गर्भावस्था के आख़िरी महीनों में (लगभग 28 हफ़्ते के बाद), जब बच्चे का वज़न खून की नलियों पर दबाव डालकर faint को बढ़ा सकता है।
सिर, गर्दन या पीठ में चोट का शक
अगर व्यक्ति गिरा है और सिर, गर्दन या पीठ में चोट लगी हो सकती है, तो ज़रूरत न हो तब तक उन्हें न हिलाएं। ज़रूरत का मतलब जैसे आग या ट्रैफ़िक का ख़तरा। 108 या 112 पर कॉल करें और उन्हें स्थिर रखें।
हर faint के बाद डॉक्टर को दिखाएं
व्यक्ति पूरी तरह ठीक भी हो जाए, फिर भी डॉक्टर को दिखाएं। NHS कहता है कि यह शायद गंभीर नहीं है, पर जाँच कराना ज़रूरी है ताकि कारण पता चले। कुछ कारण दिल से जुड़े होते हैं, और उन्हें बाहर से पहचाना नहीं जा सकता।
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आम कारण, संक्षेप में
NHS के अनुसार कारणों में शामिल हैं: बहुत जल्दी खड़े होना, पर्याप्त खाना-पीना न होना, बहुत गर्मी, बहुत परेशान होना या तेज़ दर्द, और दिल की समस्याएं। रोज़मर्रा में बैठे से अचानक खड़े होना, गर्मी में dehydration, देर तक एक जगह खड़े रहना और भोजन छोड़ना ऐसे आम हालात हैं जिनमें लोग faint होते हैं। यह सिर्फ़ जानकारी है। किसी एक व्यक्ति के faint का कारण बाहर से देखकर कोई नहीं बता सकता, और यह लेख किसी का diagnosis नहीं करता।
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बोतल कोई इलाज नहीं है। बस नियमित पानी पीना आसान हो जाता है।
अपने परिवार को भेजें
इस box का screenshot लें और अपने family WhatsApp group में भेजें। दस सेकंड लगते हैं और steps हर उम्र के लिए एक जैसे हैं।
Save करें और भेजें: कोई faint हो जाए तो
- Response चेक करें। नाम लेकर पुकारें, कंधा थपथपाएं।
- साँस चेक करें। छाती को 10 सेकंड तक देखें।
- साँस सामान्य है? सीधा लिटाएं, पैर ऊपर उठाएं।
- 1 मिनट में होश नहीं आया? 108 / 112 पर कॉल करें। Recovery position में रखें।
साँस नहीं चल रही, या सिर्फ gasping है: तुरंत 112 पर कॉल करें और CPR शुरू करें।
चेहरे पर पानी नहीं। बैठाएं नहीं। थप्पड़ न मारें, ज़ोर से न हिलाएं। हर faint के बाद डॉक्टर को दिखाएं। Emergency नंबर: 108 (एम्बुलेंस, कई राज्यों में) · 112 (राष्ट्रीय)। Health Beats by Biswa
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यह लेख स्वास्थ्य शिक्षा है, चिकित्सा सलाह नहीं, और किसी व्यक्ति का diagnosis नहीं। यह लेखक के अपने विचार हैं, जो एक nursing और public-health professional के रूप में हैं, और किसी नियोक्ता या संस्था का प्रतिनिधित्व नहीं करते। जो कोई faint हुआ हो, उसे योग्य डॉक्टर को दिखाएं।
और पढ़ें
Sources
- NHS (UK) — Fainting, symptoms page। nhs.uk/symptoms/fainting
- American Red Cross — Fainting, first aid। redcross.org, Learn first aid: Fainting
- भारत सरकार — 112 India, Emergency Response Support System। 112.gov.in
- National Health Mission, Odisha — Patient Transport (108 एम्बुलेंस सेवा)। nhmodisha.gov.in
